सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में हरित पर्यटन एवं रोजगार
- Author डी0एस0 परिहार
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- DOI https://ww
- Country : India
- Subject : भूगोल
आधुनिक समय में विश्व के समस्त देशों में पर्यटन का विकास बहुत तेजी से हो रहा है, जो कई पर्यटन स्थलों में लोगों के आजीविका एवं रोजगार के रूप में मुख्य साधन भी बन गया है। किसी भी राष्ट्र या क्षेत्र के विकास में पर्यटन एक महत्वपूर्ण क्रिया है। पर्यटन गतिविधियों ने एक उद्योग का रूप ले लिया है, इसमें रोजगार की संभावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता ने विश्व के पर्यावरणविदों को चिंतित किया है। अनियोजित एवं अनियंत्रित पर्यटन से जैव-विविधता के साथ पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित होता है। अतः इन दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए पर्यटकों को हरित पर्यटन हेतु जागरूक करना अतिआवश्यक हो गया है। हरित पर्यटन समस्त पर्यटन का वह भाग है, जो प्रकृति पर आधारित है, पारिस्थितिकी का पोषक होने के साथ जिसमें शिक्षा एवं विश्लेषण मुख्य घटक है और स्थानीय लोगों के लिए आजीविका एवं रोजगार का मुख्य साधन है। हरित पर्यटन से स्थानीय क्षेत्र के विकास के साथ ही साथ लोगों को रोजगार प्राप्त होगा एवं पर्यावरण संरक्षण भी किया जा सकता है। हरित पर्यटन से भौतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पर्यावरण के पतन को रोका जा सकता है। सीमांत जनपदपिथौरागढ़ एक प्रसिद्ध हरित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यह स्थल हिमालय के तलहटी में होने से प्राचीन काल से जैवविविधता एवं पारिस्थितिकी दृष्टि से संपन्न रहा है। जिस कारण वन एवं वन्य उत्पाद यहाँके लोगों के लिए आजिविका, रोजगार एवं भोजन का माध्यम बने हुए हैं, इस क्षेत्र में हरित पर्यटन एवं रोजगार की क्षमता विद्यमान है। यह हिमालय पर्वत श्रृंखला में स्थित होने के कारण यहाँ का भूदृश्य, गहरी घाटियाँ, नदियाँ, वन एवं वन्य जीव पूरे विश्व में पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र हैं। जिससे स्थानीय लोगों की सहभागिता, होटल, भोजनालय, परिवहन, पार्क, होमस्टे, बागवानी, स्थानीय उत्पाद के माध्यम से रोजगार में वृद्धि की जा सकती है। पर्यटन में रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं, इसलिये हरित पर्यटन के विकास से सीमांत जनपदपिथौरागढ़ में स्थानीय क्षमता, आजीविका, रोजगार एवं सतत विकास किया जा सकेगा।
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